एक नीली सी रोशनी और उंगलियों का ठहराव,
सर्च बार में तुम्हारा नाम,
और दिल में एक खिंचाव।
बरसों हो गए बात किए,
पर आज भी ये आदत नहीं गई,
तुम्हारी प्रोफाइल देखना,
जैसे किसी पुराने जख्म की छुअन हो गई।
एक डिजिटल दुनिया का ये छोटा सा कोना।
तुम्हारी नई प्रोफाइल पिक्चर,
और वो बदली हुई मुस्कान,
अब हम तुम्हारे दोस्त नहीं रहे,
बस एक धुंधली सी पहचान।
तुमने चेक-इन किया है किसी नए शहर के कैफे में,
और हम यहाँ अटक गए हैं,
उसी पुरानी यादों के घेरे में।
सब कुछ बदल गया,
बस हम नहीं बदले।
म्यूचुअल फ्रेंड्स की लिस्ट में हमारा नाम अब साथ नहीं आता,
तुम्हारी टाइमलाइन का कोई भी किस्सा,
अब मुझे नहीं भाता।
तुमने नई यादें साझा की हैं,
नए चेहरों के साथ, और मैं आज भी ढूँढ रहा हूँ,
उन पुरानी तस्वीरों में अपनी बात।
एक फासला है जो अब कभी नहीं मिटेगा।
'ऐड फ्रेंड' के बटन पर हाथ जाकर रुक जाता है,
पुराना स्वाभिमान,
पुरानी चोट की याद दिलाता है।
हम अब सिर्फ एक 'फॉलोअर' बनकर रह गए हैं,
जो तुम्हारी खुशियों को बस दूर से सह गए हैं।
ये खामोश निगरानी भी एक सजा है।
5. अचानक स्क्रीन बंद करता हूँ,
तो अपना ही अक्स दिखता है,
ये पागल दिल आज भी,
तुम्हारे ही पते पर बिकता है।
तुम ऑनलाइन हो,
पर मेरे लिए हमेशा के लिए 'लॉग आउट' हो,
मेरी इस अधूरी कहानी का,
तुम सबसे बड़ा 'डाउट' हो।
बस एक क्लिक का फासला,
और मीलों की दूरी।
_वैभव कुमार सेजवार_
@SejwarInkOfficial
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