Monday, March 23
मोहब्बत से परहेज़
मुसाफिर की डायरी
Sunday, March 22
सफरनामा-ए-जिंदगी
एक खुली किताब है, ये मेरा सफरनामा-ए-जिंदगी,
जहाँ हर कदम पर है संघर्ष, और हर मोड़ पर बंदगी।
वैभव की इस दास्ताँ में, कोई पन्ना कोरा नहीं,
ज़िंदगी ने जो सिखाया, वो किसी और ने बोला नहीं।
शुरुआत हुई थी बचपन की, उन छोटी गलियों से,
जहाँ सपने महकते थे, फूलों की कच्ची कलियों से।
फिर जवानी के सफर में, तूफानों से नाता जुड़ गया,
जहाँ से चाहा था सीधा जाना, रास्ता वहीं से मुड़ गया।
सफरनामे में दर्ज हैं, वो रातें जो जागकर काटीं,
वो खुशियाँ जो कम थीं, पर हमने दिल खोलकर बांटीं।
कभी लगा कि सब खत्म है, अंधेरा बहुत घना है,
पर वैभव ने जाना कि हर अंधेरा, सवेरे का ही तना है।
लिखा है इसमें उन लोगों का नाम, जो छोड़कर चले गए,
और उनका भी शुक्रिया, जो मुश्किलों में साथ पले-बढ़े।
ज़िंदगी के इस सफरनामे में, जीत से ज़्यादा हार के किस्से हैं,
क्योंकि वही हार तो, मेरी तरक्की के सबसे बड़े हिस्से हैं।
कभी रेगिस्तान की तपिश, तो कभी पहाड़ों की ठंडक मिली,
ज़िंदगी की इस पाठशाला में, मुझे हर तरह की दस्तक मिली।
वैभव ने सीखा कि मुसाफिर का, कोई पक्का पता नहीं होता,
जहाँ सुकून मिल जाए, वहीं उसका खुदा होता।
ये सफरनामा अभी जारी है, अभी कई पन्ने बाकी हैं,
अभी कई रास्तों की, हसीन रंगीनियां और झांकियां बाकी हैं।
स्याही मेरी हिम्मत है, और कागज़ मेरा ये हौसला है,
तय करना है अभी मुझे, बहुत बड़ा ये फासला है।
सफरनामा-ए-जिंदगी, एक मुसाफिर की रूह की गवाही है,
जहाँ शब्दों के रूप में, बहती हुई मेरी ही सच्चाई है।
वैभव की ये यात्रा, बस चलती ही रहेगी यूँ ही,
मंज़िल मिले न मिले, सफर की खूबसूरती रहेगी यूँ ही।
लेखक: वैभव कुमार सेजवार
रास्तों की इबारत
पग-पग सीख
अनुभव का कारवां
राहों के रंग
रास्तों की सीख
सर्च बार का सन्नाटा (Silence of the Search Bar)
आर्काइव की आहटें (The Echoes of Archive)
A Digital Heartbeat (डिजिटल धड़कन)
भीगती यादें (Drenched Memories)
अनसुनी दस्तक (The Unheard Knock)
वो स्कूल वाली राहें
यादों की चौखट
अनाड़ी दिल
जीवन का कारवां
"यादों का मुसाफ़िर"
खामोशी या कुछ और
भरोसे का धोखा
लहरों से लड़ती कश्ती
मेहनत का संकल्प (कविता)
थकी आँखों में सपनों का, हसीं मंजर ज़रूरी है,
समंदर फतह करने को, मगर लंगर ज़रूरी है।
बिना मेहनत के हाथों में, कभी शोहरत नहीं आती,
हथेली पर अगर फल हो, तो फिर शजर ज़रूरी है।
बुलंदी पर जो पहुँचे हैं, वो रातों को न सोये थे,
सफलता के बगीचे में, उन्होंने बीज बोये थे।
ज़माना ढूँढता है बस, चमकते चाँद को हरदम,
मगर वे जानते हैं सच, जो कीचड़ में भी खोये थे।
पसीने की हर इक बूँद, कहानी खुद सुनाएगी,
तुम्हारी आज की ये चुप, कल शोर मचाएगी।
डरो मत तुम अंधेरों से, बस अपना काम करते चल,
सुबह की पहली जो किरण है, वो तुमको ही बुलाएगी।
सितारे टूटते हैं तो, फलक रोया नहीं करता,
जो खोता है वही अक्सर, नया कुछ पाया करता।
मशक्कत की सड़कों पर, खड़ा है जो निडर होकर,
मुकद्दर भी उसी के सामने, सर को झुकाया करता।
लेखक:-वैभव कुमार सेजवार
अधूरा किनारा
पिता का साया
कुछ बातें कुछ सवाल
यादों का झूला
कागज़ की कश्ती
मोहब्बत का चक्रव्यूह
मेरा घर (कविता)
संकल्प की शक्ति (कविता)
उमंगों का कारवां
जीवन का दर्पण
तुम्हारी रूह का सफ़रनामा
जीवन की लय (The Rhythm of Life)
झूठी हंसी
बदलाव इंसान का
लफ्ज़ों की धड़कन (Heartbeat of Words) - कविता
मौन के अक्षर
स्याही के नग्मे: एक महा-यात्रा
कुछ लोग बिछड़कर भी अपने रह जाते हैं...
कुछ लोग बिछड़कर भी अपने रह जाते हैं... हर प्रेम... मंज़िल तक पहुँचे... यह ज़रूरी नहीं होता... कुछ प्रेम... रास्तों में बिछड़कर भी... उम्र भर...
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हम चाहते ही नहीं कि ये दिल किसी के नाम हो जाए, नाम हुआ तो फिर ख्यालों में तेरी तस्वीर सजेगी, तस्वीर सजी तो फिर तुझे देखने की तड़प जागेगी, ...
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वक़्त की धूल उड़ती है और यादें साथ चलती हैं, वैभव के इस कारवां में, नई उम्मीदें पलती हैं। निकल पड़ा था अकेला, हाथ में बस एक ख़्वाब था, मगर तजुर...