Sunday, March 22

A Digital Heartbeat (डिजिटल धड़कन)



स्क्रॉल करते-करते अंगूठा रुक सा गया, 
एक 'स्टोरी' दिखी और दिल झुक सा गया। 
रिप्लाई करूँ या बस एक 'हार्ट' दे दूँ, सोचता हूँ कि इस खामोशी को क्या नाम दे दूँ। 
ये डीएम (DM) की दुनिया भी अजीब है।

भेजा हुआ वो मैसेज और वो 'Seen' का इंतज़ार, 
जैसे किसी पुराने शहर में अपनों का इंतज़ार। 
तुमने रिप्लाई में बस एक इमोजी भेजा है, 
पर मेरे लिए तो जैसे खुशियों का खज़ाना भेजा है। 
बातों का सिलसिला अब रील (Reels) से शुरू होता है।
 कभी मज़ाक, 
 कभी गहरी बातें और वो लंबी रातें, 
 टाइपिंग के उस निशान में छिपी कितनी ही बातें।
 (Mute) पर रखी है दुनिया, 
 बस तुम्हारा नोटिफिकेशन चाहिए, 
 इस भागती ज़िंदगी में, 
 बस तुम्हारा थोड़ा सा अटेंशन चाहिए। 
 एक छोटा सा सर्कल, 
 और उसमें हमारी बात।
पुराने चैट्स को बार-बार पढ़ना और मुस्कुराना, 
जैसे किसी पुरानी गली में फिर से लौट जाना। 
हम अजनबी थे, 
फिर 'फॉलोअर्स' हुए और अब कुछ और हैं, 
इस डिजिटल शोर में, 
बस हमारी खामोशी का ही ज़ोर है। 
ये 'एक्टिव नाउ' (Active Now) का निशान दिल धड़काता है।

कभी-कभी डर लगता है कि कहीं तुम 'अनफॉलो' न कर दो, मेरी इन छोटी-छोटी खुशियों को कहीं मटियामेट न कर दो। पर जब तक ये चैट का धागा सलामत है, 
यकीन मानो, 
मेरे लिए हर दिन एक कयामत है। 
इंस्टाग्राम की गलियों में, 
बस तुम्हारा ही इंतज़ार 

_वैभव कुमार सेजवार_
#SejwarInkOfficial

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कुछ लोग बिछड़कर भी अपने रह जाते हैं... हर प्रेम... मंज़िल तक पहुँचे... यह ज़रूरी नहीं होता... कुछ प्रेम... रास्तों में बिछड़कर भी... उम्र भर...