Sunday, March 22

संकल्प की शक्ति (कविता)


यहाँ सपनों की महफ़िल में, 
हक़ीक़त मुस्कुराती है, 
वही है कामयाब जो, 
सदा ख़ुद को जगाती है। 
हज़ारों मोड़ आएँगे, 
डराने को सफ़र में पर, 
जुनूँ जिसका सलामत हो, 
उसे मंज़िल बुलाती है॥

कि जैसे आसमाँ में भी, 
सितारे जगमगाते हैं, 
कि जैसे हार के डर से, 
भी योद्धा जीत लाते हैं। 
भले ही वक़्त की आंधी, 
उखाड़े जड़ दरख़्तों की, 
मगर जो बीज पक्के हों, 
वो अंकुर बन के आते हैं॥

दुआओं की जो पूँजी है, 
उसे तुम साथ रखना बस, 
वफ़ा की साफ़ नीयत को, 
हमेशा हाथ रखना बस। 
दिखावे की इस दुनिया में, 
सरल रहना ही मंज़िल है, 
ज़ुबाँ पर मीठी बातें और, 
दिल में साथ रखना बस॥

पुराना कल तो आईना, 
उसे देखोगे तो सीखो, 
नया जो कल है कोरा है, 
उसपे तुम भाग्य को लिखो। 
थकन पाँवों की कहती है, 
कि अब रुकना ही बेहतर है, 
मगर ये रूह कहती है, 
कि बढ़ कर अर्श (आसमान) पे दिखो॥

अँधेरी रात के साये, 
भी अब तो हार मानेंगे, 
तेरी हिम्मत की गाथा को, 
यहाँ सब लोग जानेंगे। 
यही आख़िरी सन्देश है, 
कि ख़ुद पर तुम यक़ीन रखना, 
कि पत्थर भी तुम्हें अब तो, 
पारस की तरह मानेंगे॥

_वैभव कुमार सेजवार_
#SejwarInkOfficial

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