Sunday, March 22

आर्काइव की आहटें (The Echoes of Archive)



पुराना व्हाट्सएप चैट

उंगलियों का एक गलत स्पर्श, 
और पुराना नाम ऊपर आ गया, 
सन्नाटे में जैसे कोई, 
भूला हुआ गीत गुनगुना गया। 
सालों पहले का वो आख़िरी मैसेज, 
आज भी वहीं खड़ा है, 
जैसे वक्त इस नीली स्क्रीन पर, 
कहीं आकर जम गया है। 
ये यादों का डिजिटल पुलिंदा है।

 वो लंबी रातें जब टाइपिंग का निशान, 
दिल की धड़कन बढ़ाता था, 
हर एक इमोजी का अपना, 
एक अलग ही मतलब होता था। 
आज वो बातें पढ़कर, 
खुद पर ही हंसी आती है, 
कैसे छोटी-छोटी खुशियाँ, 
पूरी दुनिया बन जाती हैं। 
वो दौर अब बस आर्काइव में है।

ऊपर स्क्रॉल करते हुए, 
हँसी और झगड़े सब साथ आते हैं, 
वो वादे जो कभी टूटे नहीं, 
आज चुपचाप मुँह चिढ़ाते हैं। 
तस्वीरें जो कभी 'स्टेटस' थीं, 
अब गैलरी में भी नहीं, 
पर इस चैट की हिस्ट्री में, 
वो आज भी कहीं न कहीं हैं। 
एक अधूरा सफ़र, 
यहाँ आज भी जारी है।

मन करता है एक 'Hi' लिख दूँ, 
पर हाथ रुक जाते हैं, 
अब हम सिर्फ़ एक-दूसरे की,
 'About' लाइन पढ़ पाते हैं। 
तुम ऑनलाइन हो, 
पर ये हरा निशान अब मेरे लिए नहीं, 
हम अजनबी बन गए हैं, 
पर ये चैट गवाह है कि हम कभी अजनबी नहीं थे। 
मैसेज डिलीट करना, 
यादें मिटाना नहीं होता।

अचानक बाहर आता हूँ, 
और चैट को फिर से नीचे धकेल देता हूँ, 
अपनी ज़िंदगी के इस हिस्से को, 
फिर से सहेज देता हूँ। 
शायद किसी दिन ये फोन बदलेगा, 
और ये चैट खो जाएगी, 
पर वो जो जिया था हमने, 
वो बात हमेशा रह जाएगी। 
पुराना व्हाट्सएप चैट, 
एक बंद कमरे की तरह है।

_वैभव कुमार सेजवार_
#SejwarInkOfficial

No comments:

कुछ लोग बिछड़कर भी अपने रह जाते हैं...

कुछ लोग बिछड़कर भी अपने रह जाते हैं... हर प्रेम... मंज़िल तक पहुँचे... यह ज़रूरी नहीं होता... कुछ प्रेम... रास्तों में बिछड़कर भी... उम्र भर...