चेहरे पर ये जो मुस्कान है,
बस एक दिखावा है,
अंदर कहीं छुपा,
एक गहरा सा पछतावा है।
सब पूछते हैं कैसे हो,
मैं कहता हूँ सब ठीक है,
पर मेरी खामोश धड़कनों में,
एक अजीब सा घाव है।
होठों पर हंसी सजाकर,
मैं दुनिया को बहलाता हूँ,
अकेले में खुद को,
आईने के सामने तड़पाता हूँ।
ये झूठी हंसी,
मेरी रूह की ढाल बन गई है,
सच्चाई को छिपाने की,
एक मज़बूत जाल बन गई है।
भीड़ में सब हंस रहे हैं,
तो मुझे भी हंसना पड़ता है,
अपने दर्द को छुपाकर,
एक मुखौटा पहनना पड़ता है।
कौन समझेगा मेरे अंदर का ये शोर और सन्नाटा,
जब दुनिया को सिर्फ,
मेरी मुस्कान का ही पता है।
दिल के किसी कोने में,
अब भी वो जख्म ताज़ा है,
जो मेरा था,
वो अब सिर्फ एक अधूरा सा दरवाज़ा है।
ये झूठी हंसी,
मेरी तन्हाई का सबसे बड़ा सच है,
दिखने में तो खुशमिज़ाज,
पर अंदर से सब कच है।
_वैभव कुमार सेजवार_
#SejwarInkOfficial
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