Sunday, March 22

उमंगों का कारवां



यहाँ शब्दों के जाल में, 
हर कोई फँस जाता है, 
कोई लिखता है दर्द को, 
कोई बस मुस्कुराता है। 

मगर जो दिल की गहराई, 
से अल्फ़ाज़ निकलते हैं, 
वही तो रूह के प्यासे, 
को अमृत पिलाता है॥

कि जैसे रात के बाद, 
सवेरा हो के रहता है, 
कि जैसे वक़्त का दरिया, 
निरंतर बहता रहता है। 

न हारो तुम कभी हिम्मत, 
अँधेरी इन लकीरों से, 
उजाला ढूँढने वालों, 
से सूरज भी ये कहता है॥

सलीका जिसने सीखा है, 
यहाँ बस प्यार बाँटने का, 
कि हक है उसको दुनिया में, 
खुशी के गीत छाँटने का। 

नफरतों के बाज़ारों में, 
गर तुम प्यार ले आओ, 
तो जज़्बा मिल ही जाएगा, 
दुखों को जड़ से काटने का॥

हवाओं की शरारत से, 
दीये बुझ भी तो सकते हैं, 
मगर जो लौ है सीने में, 
वो पर्वत भी हिलाते हैं। 

भले मंज़िल बहुत दूर, 
और थके हों पाँव भी अपने, 
मगर विश्वास के राही, 
नया रस्ता बनाते हैं॥

पुराना हर ज़ख़्म अब, 
एक नई ताक़त बनेगा, 
तेरा हर एक ये आँसू, 
एक नई राहत बनेगा। 

बस चलते ही जाना है, 
बिना पीछे मुड़े अब तो, 
यही संघर्ष ही कल को, 
तेरी किस्मत बनेगा॥

_वैभव कुमार सेजवार_
#SejwarInkOfficial

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कुछ लोग बिछड़कर भी अपने रह जाते हैं...

कुछ लोग बिछड़कर भी अपने रह जाते हैं... हर प्रेम... मंज़िल तक पहुँचे... यह ज़रूरी नहीं होता... कुछ प्रेम... रास्तों में बिछड़कर भी... उम्र भर...