सात फेरों का अटूट बंधन
माँ की आँखों की ममता, और पिता का वो साथ,
तपती धूप में जैसे हो, शीतल छाँव की बात।
बिना कहे ही एक-दूजे की, हर उलझन हर लेते हैं,
ये वो सच्चे साथी हैं, जो मौन साथ चलते हैं।
पिता की हर उस डाँट के पीछे, माँ का वो सहलाना,
और माँ की हर इक फिक्र पर, पिता का मुस्कुराना।
कभी तकरार, कभी है प्यार, पर कभी न आई दूरी,
इन दोनों के बिना तो घर की, हर खुशहाली अधूरी।
ये प्यार नहीं दिखावे का, ये तो रूह का संगम है,
एक-दूजे के साहस से, हर मुश्किल यहाँ कम है।
हाथों में हाथ रहे सदा, बस यही दुआ हम करते हैं,
माता-पिता के इस पावन प्रेम को, शत-शत नमन करते हैं।
Written & Composed by Vaibhav Kumar Sejwar.