Sunday, May 10

सात फेरों का अटूट बंधन




माता-पिता का प्रेम उस नींव की तरह होता है जिस पर पूरा घर टिका होता है। माता-पिता पर एक कविता


सात फेरों का अटूट बंधन

माँ की आँखों की ममता, और पिता का वो साथ,
तपती धूप में जैसे हो, शीतल छाँव की बात।

बिना कहे ही एक-दूजे की, हर उलझन हर लेते हैं,
ये वो सच्चे साथी हैं, जो मौन साथ चलते हैं।

पिता की हर उस डाँट के पीछे, माँ का वो सहलाना,
और माँ की हर इक फिक्र पर, पिता का मुस्कुराना।

कभी तकरार, कभी है प्यार, पर कभी न आई दूरी,
इन दोनों के बिना तो घर की, हर खुशहाली अधूरी।

ये प्यार नहीं दिखावे का, ये तो रूह का संगम है,
एक-दूजे के साहस से, हर मुश्किल यहाँ कम है।

हाथों में हाथ रहे सदा, बस यही दुआ हम करते हैं,
माता-पिता के इस पावन प्रेम को, शत-शत नमन करते हैं।

Written & Composed by Vaibhav Kumar Sejwar.




Thursday, May 7

खामोश आँसू

आँखों भरी आँखों पलकों की कोरों में दोस्त रहते हैं,

बिना कहे ये दर्द की पूरी कहानी कहते हैं।

दुनिया की भीड़ में जो लबों से पूछते हैं,

तन्हाइयों में वही बार-बार नदी बन बहती हैं।

ना कोई शोर होता है, ना कोई शिकायत होती है,

बस यात्रा करते लम्हों की एक याद है।

गॉल पर उतरती वो नाम सी एक रूढ़ि,

अंदर ही अंदर किसी उम्मीद की बुनियाद होती है।

लोग समझते हैं कि हम संभल गए हैं अब,

हकीकत में तो जज़्बात अंदर ही अंदर दहाते हैं।

जो जुबां पर न आ सके कभी वो शब्द,

आँखों भरी आँखें उभरती रातों को सहती हैं।

ये वो समंदर हैं फ़्लैट कोई फ़्लैट नहीं,

इनके अलावा कोई और सहारा नहीं।

दिल के कोने में दिखाया गया है जो एक कास्क,

उसे आँखें मूँद कर ही बयाँ करते हैं, कोई और इशारा नहीं।

वैभव कुमार सेजवार द्वारा लिखित और संगीतबद्ध।

अधूरी मोहब्बत

अधूरी मोहब्बत का दर्द बड़ा गहरा होता है,
जैसे ठहरे हुए पानी पर कोई पहरा होता है।
कुछ लफ्ज़ जो होंठों तक आकर रुक गए,
वो जज्बात आज भी रूह में कहीं ठहरा होता है।
वो मुलाकातों का सिलसिला जो बीच में ही टूट गया,
हाथों से जैसे रेत का कोई जर्रा छूट गया।
नाराजगी नहीं है तुमसे, न कोई गिला है,
बस मलाल ये है कि मुकद्दर ही रूठ गया।
कभी शाम ढले जब यादों का दरिया बहता है,
एक खालीपन सा इस दिल के कमरे में रहता है।
पूरी हो जाती तो शायद कहानी खत्म हो जाती,
अधूरा है इश्क, तभी तो ये आज भी जिंदा रहता है।
किताब के पन्नों में दबी उस सूखी कली की तरह,
अधूरी मोहब्बत हर धड़कन में चुपके से बहती है।
मुकम्मल न सही, पर ये रूह का किस्सा है,
जो अधूरी होकर भी सबसे मुकम्मल रहती है।
Written & Composed by Vaibhav Kumar Sejwar

टूटे हुए ख्वाब

टूटे हुए ख्वाब आँखों में चुभते बहुत हैं,
अधूरे सपनो के मंजर डराते बहुत हैं।
वो जो सजाया था हसरतों का एक महल,
आज उसके खंडहर हमें रुलाते बहुत हैं।
हर ईंट पर लिखा था नाम ख़ुशी का,
अब वो सूखे पत्ते बन कर उड़ते बहुत हैं।
नींद आती नहीं अब इन सूनी रातों में,
बीते हुए लम्हे खामोशी में गूँजते बहुत हैं।
जो वादे किए थे खुद से और ज़माने से,
वो टूटे हुए काँच की तरह चुपके से चुभते बहुत हैं।
मिटा तो दी है हमने यादों की वो लकीरें,
पर जख्म पुराने आज भी सीने में दुखते बहुत हैं।
खोजता हूँ मैं खुद को उन यादों के मलबे में,
जहाँ टूटे हुए ख्वाब अब भी धड़कते बहुत हैं।
Written & Composed by Vaibhav Kumar Sejwar

मशीनों के बीच ज़िन्दगी

मशीनों के बीच ज़िन्दगी कुछ यूँ उलझ गई है,
कि धड़कनों की आवाज़ भी अब शोर में दब गई है।
सुबह उठते ही तारों का जंजाल सामने होता है,
इंसान तो जाग जाता है, पर अहसास सोता है।
पहिए घूमते हैं वक्त के, और हम साथ चलते हैं,
लोहे के इस शहर में, अरमान रोज़ ढलते हैं।
हाथों में अब मिट्टी की वो सोंधी महक नहीं आती,
डिजिटल स्क्रीन की ये चमक, रूह को नहीं भाती।
बटन दबाते ही खुशियाँ मिलने का वहम पाल लिया,
रिश्तों को भी हमने अब इनबॉक्स में डाल लिया।
थक चुके हैं पुर्जे, थिरकना भूल गए हैं पाँव,
कहाँ खो गई वो ठंडी हवा, और पीपल की छाँव?
लोहे के जिस्म में शायद दिल पत्थर का हो गया,
सपनों का वो कोमल परिंदा, कहीं दफ्तर में सो गया।
चलो इस यांत्रिक ज़माने से ज़रा बाहर निकलें,
मशीन नहीं, फिर से ज़रा इंसान बनकर निखरें।
Written & Composed by Vaibhav Kumar Sejwar

वक़्त लगता है

वक़्त लगता है हर घाव को भरने में,
वक़्त लगता है ख़ुद से ही मिलने में।
जो बिखर गए हैं यादों के तिनके यहाँ,
उन्हें समेट कर फिर घरौंदा बनाने में,
वक़्त लगता है।
वो जो ख़ामोशी ओढ़ ली है तुमने आज,
उस दर्द को लफ़्ज़ों में ढालने में,
वक़्त लगता है।
कभी धूप कड़ी है, कभी छाँव का बसेरा,
दिल की इस वीरान ज़मीन को गुलिस्ताँ बनाने में,
वक़्त लगता है।
पुरानी मुलाक़ातों के पन्ने पलट कर,
एक नई कहानी की शुरुआत करने में,
वक़्त लगता है।
गिरकर संभलना, संभल कर फिर चलना,
टूटे हुए ख़्वाबों की किरचें हटाने में,
वक़्त लगता है।
पर यकीन रख, सवेरा ज़रूर आएगा,
बस उस अंधेरी रात को ढलने में,
वक़्त लगता है।
Written & Composed by Vaibhav Kumar Sejwar

Monday, May 4

एहसास-ए-मुकम्मल

 एहसास-ए-मुकम्मल

तू पास हो तो हर ख्वाहिश पूरी लगती है,
तेरे बिना ये ज़िंदगी अधूरी लगती है।
धड़कनों में घुली है एक अजीब सी बेचैनी,
तू जो नहीं, तो हर साँस भी ज़रूरी लगती है।
इन खामोश रास्तों पर तेरा साथ चाहिए,
अँधेरी रातों में तेरा हाथ चाहिए।
बिखरे हुए हैं ख़्वाब ज़मीन पर कांच की तरह,
सहेज ले जो मुझको, वो जज्बात चाहिए।
वक़्त की लहरों में बहता जा रहा हूँ मैं,
तन्हाई के साये में सिमटता जा रहा हूँ मैं।
तू एक बार लौट कर फिर से पुकार ले,
खुद को ढूँढने की कोशिश में मिटता जा रहा हूँ मैं।
तेरी मुस्कुराहट में ही मेरा सवेरा है,
वरना इन आँखों में तो बस यादों का बसेरा है।
फासले जितने भी हों हमारे दरमियान,
ये दिल आज भी सिर्फ और सिर्फ तेरा है।
Written & Composed by Vaibhav Kumar Sejwar

Saturday, May 2

“टूटा हुआ दिल – Part 10”

“टूटा हुआ दिल – Part 10”

अब कहानी मुकम्मल सी लगती है,
ना कोई कमी, ना कोई सवाल,
जो टूटकर बिखरा था कभी…
आज वही बन गया है कमाल।

मैंने दर्द को दोस्त बना लिया,
और यादों से समझौता कर लिया,
जो मेरा नहीं था कभी भी…
उसे दिल से आज़ाद कर दिया।

अब ना किसी का इंतज़ार है,
ना किसी से कोई उम्मीद,
मैं खुद ही अपनी मंज़िल हूँ…
और खुद ही अपनी तस्दीक।

जो सीखा है इस इश्क़ से,
वो उम्र भर काम आएगा,
अब कोई आए या जाए जिंदगी में…
ये दिल खुद को कभी नहीं भुलाएगा।

ये अंत नहीं, एक शुरुआत है,
जहाँ मैं पूरा हूँ—अधूरा नहीं,
जो खोया था वो मिल गया मुझमें…
अब मुझे किसी और की ज़रूरत नहीं।

Written & Composed by Vaibhav Kumar Sejwar

“टूटा हुआ दिल – Part 9”

“टूटा हुआ दिल – Part 9”

अब मैं रुकता नहीं बीते लम्हों पर,
वक़्त के साथ चलना सीख लिया है,
जो कल था वो कहानी बन गया…
मैंने आज में जीना सीख लिया है।

अब ना कोई शिकायत बाकी है,
ना किसी से कोई सवाल,
जो मिला उसने सिखा दिया…
जो छूटा, वो भी रहा कमाल।

तेरे जाने का अफ़सोस नहीं अब,
शुक्रिया है उस मोड़ के लिए,
क्योंकि उसी दर्द ने गढ़ा मुझे,
इस नए और मज़बूत रूप के लिए।

अब दिल में सुकून रहता है,
और खामोशी भी गीत लगती है,
जो तन्हाई कभी डराती थी…
अब वही मेरी जीत लगती है।

मैंने खुद को पा लिया आखिर,
ये सफर आसान तो नहीं था,
पर जो इंसान आज बना हूँ मैं…
वो पहले कभी कहीं था नहीं।

Written & Composed by Vaibhav Kumar Sejwar

“टूटा हुआ दिल – Part 8”

“टूटा हुआ दिल – Part 8”

अब दिल को समझा लिया है मैंने,
हर चाहत को सुला दिया है,
जो ख्वाब तेरे नाम से जुड़े थे,
उन्हें वक़्त ने भुला दिया है।

मैंने सीखा है छोड़ना भी,
हर बात को थामे रहना नहीं,
जो मेरा था ही नहीं कभी…
उसे अपना मानकर जीना सही नहीं।

अब सफर अकेला सही,
पर सच्चा और साफ़ है,
कोई दिखावा नहीं अब रिश्तों में,
बस खुद से ही मेरा लगाव है।

मैंने अपनी कीमत पहचान ली है,
अब किसी के लिए नहीं झुकता,
जो खुद को खो दे इश्क़ में…
वो फिर कहीं का नहीं रहता।

तू भी अपनी दुनिया में खुश रह,
मैं भी अपने रास्ते पर चल पड़ा हूँ,
जो कहानी अधूरी रह गई थी…
उसे अब मैं खुद पूरा कर रहा हूँ।

Written & Composed by Vaibhav Kumar Sejwar

“टूटा हुआ दिल – Part 7”

“टूटा हुआ दिल – Part 7”

अब खामोशी भी दोस्त बन गई है,
और तन्हाई सज़ा नहीं लगती,
जो खालीपन कभी चुभता था,
अब वही मेरी पनाह सी लगती।

मैंने उम्मीदें रखना छोड़ दिया,
अब बस मेहनत से रिश्ता है,
दिल अब किसी पर नहीं टिकता…
अब खुद पर ही भरोसा सच्चा है।

तेरी यादें अब आती तो हैं,
पर दिल को तोड़ नहीं पाती,
क्योंकि जो खुद से जुड़ गया हो,
उसे कोई जुदाई हिला नहीं पाती।

अब जो मुस्कुराहट है मेरे चेहरे पर,
वो किसी के आने से नहीं,
बल्कि खुद को पाने से आई है…
और यही मेरी सबसे बड़ी जीत सही।

अगर कभी मिल भी जाए तू राहों में,
तो बस एक अजनबी सा सलाम होगा,
क्योंकि जो कभी मेरी दुनिया थी…
अब बस एक बीता हुआ नाम होगा।

Written & Composed by Vaibhav Kumar Sejwar

“टूटा हुआ दिल – Part 6”

“टूटा हुआ दिल – Part 6”

अब मैं भागता नहीं यादों से,
उन्हें चुपचाप गुजरने देता हूँ,
जो कभी मेरी कमजोरी थीं,
आज उन्हीं से मैं खुद को गढ़ता हूँ।

तेरा नाम अब भी आता है कभी-कभी,
पर दिल अब वैसा नहीं धड़कता,
जो पहले हर धड़कन में तू थी…
अब वहाँ मेरा खुद का वजूद बसता।

मैंने माफ़ भी कर दिया तुझे,
और खुद को भी आज़ाद किया,
जो रिश्ता हमें बांध रहा था,
उससे आगे बढ़ने का इरादा किया।

अब जो आईना देखता हूँ मैं,
तो एक नया इंसान नज़र आता है,
जो टूटकर बिखरा नहीं…
बल्कि हर टुकड़े से और निखर जाता है।

ये कहानी खत्म नहीं हुई अभी,
बस एक नया मोड़ आया है,
जहाँ दर्द नहीं, सुकून है…
और मैंने खुद को फिर से पाया है।

Written & Composed by Vaibhav Kumar Sejwar

“टूटा हुआ दिल – Part 5”

“टूटा हुआ दिल – Part 5”

अब सुकून मिलने लगा है मुझे,
तेरे बिना जीने की आदत हो गई,
जो खालीपन तू छोड़ गया था,
वो भी अब मेरी राहत हो गई।

मैंने सीखा है खुद को समझना,
हर दर्द को शब्दों में ढालना,
अब आंसू नहीं बहते बेवजह,
मैंने सीख लिया है संभलना।

तेरी यादें अब बोझ नहीं,
बस एक बीती कहानी हैं,
जिसमें मैं था पूरा तेरा…
और तू बस मेरी नादानी है।

अब जो रास्ता चुना है मैंने,
वो सिर्फ मेरा है, मेरा ही रहेगा,
कोई आए या जाए जिंदगी में,
अब ये दिल खुद से ही सच्चा रहेगा।

इश्क़ ने तोड़कर जो बनाया मुझे,
वो पहचान अब खास बन गई,
मैं गिरा जरूर था तेरे जाने के बाद…
पर अब मेरी उड़ान आसमान बन गई।

Written & Composed by Vaibhav Kumar Sejwar

टूटा हुआ दिल – Part 4”

“टूटा हुआ दिल – Part 4”

अब मैं वैसा नहीं रहा,
जैसा तेरे साथ हुआ करता था,
दिल अब भी धड़कता है मगर,
किसी के लिए यूँ नहीं झुकता था।

मैंने खुद को फिर से बनाया है,
टूटे टुकड़ों को जोड़कर,
अब मुस्कुराता हूँ मैं भी…
पर दर्द छुपाकर, होठों को मोड़कर।

तूने जो छोड़ा था अधूरा मुझे,
मैंने उसे मुकम्मल कर लिया,
अब किसी के सहारे की ज़रूरत नहीं,
मैंने खुद से ही रिश्ता कर लिया।

अब अगर तू लौट भी आए,
तो शायद मैं रुक ना पाऊँ,
क्योंकि जिस रास्ते पर मैं बढ़ चुका हूँ,
वहाँ तेरा नाम भी नहीं लाऊँ।

ये इश्क़ अब कमजोरी नहीं,
मेरी सबसे बड़ी सीख बन गया है,
और जो मैं आज बना हूँ…
वो तेरे जाने के बाद ही बन पाया है।

Written & Composed by Vaibhav Kumar Sejwar

टूटा हुआ दिल – Part 3”

“टूटा हुआ दिल – Part 3”

अब दर्द नहीं, आग बाकी है,
जो दिल में धीरे-धीरे जलती है,
जिसे कभी खुद से ज्यादा चाहा था,
अब वही याद चुभती है, बदलती है।

तूने छोड़ा था मुझे कमजोर समझकर,
पर तू ये भूल गया एक बात,
टूटे हुए लोग ही सबसे खतरनाक होते हैं,
जब वो बना लेते हैं अपनी औकात।

अब ना तेरी यादों का असर है मुझ पर,
ना तेरे नाम से दिल धड़कता है,
मैंने खुद को इतना मजबूत बना लिया,
कि अब हर दर्द मुझसे डरता है।

तू खुश रह… यही दुआ है मेरी,
पर अब फर्क नहीं पड़ता तेरी खुशी से,
क्योंकि मैंने सीख लिया है जीना,
अपने दम पर, अपनी ही रोशनी से।

जो खोया था, वो सबक बन गया,
जो टूटा था, वो हौसला बन गया,
अब जो मैं बना हूँ, वो पहले कभी नहीं था—
तेरा जाना ही मेरी ताकत बन गया।

Written & Composed by Vaibhav Kumar Sejwar

“टूटा हुआ दिल – Part 2”

“टूटा हुआ दिल – Part 2”

अब शिकायत भी नहीं करता मैं उससे,
क्योंकि हक़ ही खत्म हो चुका है,
जिसे अपना समझकर सब कुछ दिया,
वो रिश्ता ही कहीं खो चुका है।

उसकी यादें अब भी साथ चलती हैं,
जैसे साया धूप में पीछा करता है,
मैं भूलना भी चाहूँ तो कैसे भूलूँ,
दिल हर पल उसका नाम दोहराता है।

वो हँसता होगा अब किसी और के साथ,
ये सोचकर भी मुस्कुरा देता हूँ मैं,
क्योंकि प्यार सच्चा था मेरा,
इसलिए आज भी उसे बद्दुआ नहीं देता हूँ मैं।

टूटकर भी खड़ा हूँ आज मैं,
थोड़ा बिखरा, पर जिंदा हूँ,
उसने छोड़ा तो क्या हुआ…
मैं अब खुद के लिए ही काफी हूँ।

शायद एक दिन ये दर्द भी कम होगा,
और दिल फिर से मुस्कुराएगा,
पर जो सिखा गया वो इश्क़ मुझे,
वो सबक उम्र भर साथ जाएगा।

Written & Composed by Vaibhav Kumar Sejwar  

“टूटा हुआ दिल”

“टूटा हुआ दिल”

वो जो कभी मेरा था,
आज किसी और की कहानी बन गया,
मैंने जिसे खुद से ज्यादा चाहा,
वो मुझे अधूरा छोड़कर चला गया।

रातों में अब भी उसका नाम आता है,
नींद नहीं, बस दर्द सुलाता है,
हर खामोशी में उसकी आवाज़ सुनाई देती है,
पर सच ये है—वो कभी लौटकर नहीं आता है।

मैंने खुद को उसमें इतना खो दिया,
कि अब आईने में भी मैं नहीं दिखता,
दिल तो आज भी उसका इंतज़ार करता है,
पर दिमाग अब सच समझ चुका है—वो मेरा नहीं रहा।

कभी सोचा था साथ उम्र भर चलेगा,
पर वो सफर बीच रास्ते ही खत्म हो गया,
मैं आज भी वहीं खड़ा हूँ…
और वो किसी और के साथ आगे बढ़ गया।

अब दर्द से ही दोस्ती कर ली है मैंने,
आँसूओं से ही बातें होती हैं,
क्योंकि जिसे अपना समझा था सबसे ज्यादा,
उसी ने सबसे गहरी चोट दी है।


Written & Composed by Vaibhav Kumar Sejwar @Sejwarinkofficial 

कुछ लोग बिछड़कर भी अपने रह जाते हैं...

कुछ लोग बिछड़कर भी अपने रह जाते हैं... हर प्रेम... मंज़िल तक पहुँचे... यह ज़रूरी नहीं होता... कुछ प्रेम... रास्तों में बिछड़कर भी... उम्र भर...