वो जो कभी मेरा था,
आज किसी और की कहानी बन गया,
मैंने जिसे खुद से ज्यादा चाहा,
वो मुझे अधूरा छोड़कर चला गया।
रातों में अब भी उसका नाम आता है,
नींद नहीं, बस दर्द सुलाता है,
हर खामोशी में उसकी आवाज़ सुनाई देती है,
पर सच ये है—वो कभी लौटकर नहीं आता है।
मैंने खुद को उसमें इतना खो दिया,
कि अब आईने में भी मैं नहीं दिखता,
दिल तो आज भी उसका इंतज़ार करता है,
पर दिमाग अब सच समझ चुका है—वो मेरा नहीं रहा।
कभी सोचा था साथ उम्र भर चलेगा,
पर वो सफर बीच रास्ते ही खत्म हो गया,
मैं आज भी वहीं खड़ा हूँ…
और वो किसी और के साथ आगे बढ़ गया।
अब दर्द से ही दोस्ती कर ली है मैंने,
आँसूओं से ही बातें होती हैं,
क्योंकि जिसे अपना समझा था सबसे ज्यादा,
उसी ने सबसे गहरी चोट दी है।
Written & Composed by Vaibhav Kumar Sejwar @Sejwarinkofficial
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