अब मैं वैसा नहीं रहा,
जैसा तेरे साथ हुआ करता था,
दिल अब भी धड़कता है मगर,
किसी के लिए यूँ नहीं झुकता था।
मैंने खुद को फिर से बनाया है,
टूटे टुकड़ों को जोड़कर,
अब मुस्कुराता हूँ मैं भी…
पर दर्द छुपाकर, होठों को मोड़कर।
तूने जो छोड़ा था अधूरा मुझे,
मैंने उसे मुकम्मल कर लिया,
अब किसी के सहारे की ज़रूरत नहीं,
मैंने खुद से ही रिश्ता कर लिया।
अब अगर तू लौट भी आए,
तो शायद मैं रुक ना पाऊँ,
क्योंकि जिस रास्ते पर मैं बढ़ चुका हूँ,
वहाँ तेरा नाम भी नहीं लाऊँ।
ये इश्क़ अब कमजोरी नहीं,
मेरी सबसे बड़ी सीख बन गया है,
और जो मैं आज बना हूँ…
वो तेरे जाने के बाद ही बन पाया है।
Written & Composed by Vaibhav Kumar Sejwar
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