अब शिकायत भी नहीं करता मैं उससे,
क्योंकि हक़ ही खत्म हो चुका है,
जिसे अपना समझकर सब कुछ दिया,
वो रिश्ता ही कहीं खो चुका है।
उसकी यादें अब भी साथ चलती हैं,
जैसे साया धूप में पीछा करता है,
मैं भूलना भी चाहूँ तो कैसे भूलूँ,
दिल हर पल उसका नाम दोहराता है।
वो हँसता होगा अब किसी और के साथ,
ये सोचकर भी मुस्कुरा देता हूँ मैं,
क्योंकि प्यार सच्चा था मेरा,
इसलिए आज भी उसे बद्दुआ नहीं देता हूँ मैं।
टूटकर भी खड़ा हूँ आज मैं,
थोड़ा बिखरा, पर जिंदा हूँ,
उसने छोड़ा तो क्या हुआ…
मैं अब खुद के लिए ही काफी हूँ।
शायद एक दिन ये दर्द भी कम होगा,
और दिल फिर से मुस्कुराएगा,
पर जो सिखा गया वो इश्क़ मुझे,
वो सबक उम्र भर साथ जाएगा।
Written & Composed by Vaibhav Kumar Sejwar
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