अब मैं रुकता नहीं बीते लम्हों पर,
वक़्त के साथ चलना सीख लिया है,
जो कल था वो कहानी बन गया…
मैंने आज में जीना सीख लिया है।
अब ना कोई शिकायत बाकी है,
ना किसी से कोई सवाल,
जो मिला उसने सिखा दिया…
जो छूटा, वो भी रहा कमाल।
तेरे जाने का अफ़सोस नहीं अब,
शुक्रिया है उस मोड़ के लिए,
क्योंकि उसी दर्द ने गढ़ा मुझे,
इस नए और मज़बूत रूप के लिए।
अब दिल में सुकून रहता है,
और खामोशी भी गीत लगती है,
जो तन्हाई कभी डराती थी…
अब वही मेरी जीत लगती है।
मैंने खुद को पा लिया आखिर,
ये सफर आसान तो नहीं था,
पर जो इंसान आज बना हूँ मैं…
वो पहले कभी कहीं था नहीं।
Written & Composed by Vaibhav Kumar Sejwar
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