अब दिल को समझा लिया है मैंने,
हर चाहत को सुला दिया है,
जो ख्वाब तेरे नाम से जुड़े थे,
उन्हें वक़्त ने भुला दिया है।
मैंने सीखा है छोड़ना भी,
हर बात को थामे रहना नहीं,
जो मेरा था ही नहीं कभी…
उसे अपना मानकर जीना सही नहीं।
अब सफर अकेला सही,
पर सच्चा और साफ़ है,
कोई दिखावा नहीं अब रिश्तों में,
बस खुद से ही मेरा लगाव है।
मैंने अपनी कीमत पहचान ली है,
अब किसी के लिए नहीं झुकता,
जो खुद को खो दे इश्क़ में…
वो फिर कहीं का नहीं रहता।
तू भी अपनी दुनिया में खुश रह,
मैं भी अपने रास्ते पर चल पड़ा हूँ,
जो कहानी अधूरी रह गई थी…
उसे अब मैं खुद पूरा कर रहा हूँ।
Written & Composed by Vaibhav Kumar Sejwar
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