Saturday, May 2

“टूटा हुआ दिल – Part 10”

“टूटा हुआ दिल – Part 10”

अब कहानी मुकम्मल सी लगती है,
ना कोई कमी, ना कोई सवाल,
जो टूटकर बिखरा था कभी…
आज वही बन गया है कमाल।

मैंने दर्द को दोस्त बना लिया,
और यादों से समझौता कर लिया,
जो मेरा नहीं था कभी भी…
उसे दिल से आज़ाद कर दिया।

अब ना किसी का इंतज़ार है,
ना किसी से कोई उम्मीद,
मैं खुद ही अपनी मंज़िल हूँ…
और खुद ही अपनी तस्दीक।

जो सीखा है इस इश्क़ से,
वो उम्र भर काम आएगा,
अब कोई आए या जाए जिंदगी में…
ये दिल खुद को कभी नहीं भुलाएगा।

ये अंत नहीं, एक शुरुआत है,
जहाँ मैं पूरा हूँ—अधूरा नहीं,
जो खोया था वो मिल गया मुझमें…
अब मुझे किसी और की ज़रूरत नहीं।

Written & Composed by Vaibhav Kumar Sejwar

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कुछ लोग बिछड़कर भी अपने रह जाते हैं... हर प्रेम... मंज़िल तक पहुँचे... यह ज़रूरी नहीं होता... कुछ प्रेम... रास्तों में बिछड़कर भी... उम्र भर...