न ऊँचे महल माँगिये,
न दुनिया की मिसाल बनिये,
मिट्टी के पुतले हैं हम,
बस इंसानियत की मिसाल बनिये...
न शिकवा ज़माने से कीजिये,
न गिला तक़दीर से कीजिये,
जो पास है उसमें खुश रहिये,
बस शुक्र का दामन थाम लीजिये...
न दौड़ में शामिल रहिये,
न किसी से होड़ रखिये,
ज़िन्दगी एक खूबसूरत सफर है,
बस सहजता से चल दीजिये...
न कल की फिक्र में डूबिये,
न बीते कल को याद कीजिये,
साँसें जो मिली हैं आज,
बस खुलकर इन्हें जी लीजिये...
न चादर बड़ी कीजिये,
न ख्वाहिशें दफन कीजिये,
चार दिन की ज़िन्दगी है,
बस चैन से बसर कीजिये...
न परेशान किसी को कीजिये,
न हैरान किसी को कीजिये,
कोई लाख गलत भी बोले,
बस मुस्कुरा कर छोड़ दीजिये...
न रूठा किसी से कीजिये,
न झूठा वादा किसी से कीजिये,
कुछ फुरसत के पल निकालिये,
कभी खुद से भी मिला कीजिये..
रिश्तों की मिठास
न ऊँची आवाज़ रखिये,
न दिल में कोई राज़ रखिये,
ज़िन्दगी छोटी सी है,
बस प्यार का अंदाज़ रखिये...
न कमियाँ किसी की देखिये,
न खूबियाँ अपनी गिनाइये,
आईना हैं हम एक दूजे का,
बस मुस्कुरा कर गले लगाइये...
न मतलब से हाथ मिलाइये,
न स्वार्थ से रिश्ता निभाइये,
मिले जो कोई राह में,
बस अपनों सा साथ निभाइये...
न दुनिया की भीड़ में खोइये,
न तन्हाई में रोइये,
ज़िन्दगी एक दुआ है,
बस हर पल इसमें खुश रहिये...
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सादगी की राह
न दूसरों से उम्मीद रखिये,
न खुद को कम समझिये,
दिल में सबके लिए प्यार,
और लबों पर मुस्कान रखिये...
न ऊँची उड़ानों का गुमान कीजिये,
न ज़मीं से नाता तोड़िये,
वक्त तो बस मुसाफिर है,
हर लम्हें को शिद्दत से जी लीजिये...
न कल की चिंता में आज खोइये,
न बीते दुखों में दिल डुबोइये,
खूबसूरत है ये कायनात,
बस नज़रिया थोड़ा सा बदल लीजिये...
न शिकायतें हज़ारों रखिये,
न नफ़रत के बीज बोइये,
छोटी सी है ये ज़िन्दगी,
बस प्यार बाँटते हुए चल दीजिये...
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मन के कुछ सवाल
न जाने क्यों हम दौड़ रहे हैं,
किस मंज़िल की तलाश में?
क्या सुकून छिपा है तिजोरियों में,
या खुले आसमान के पास में?
न जाने क्यों हम रूठ जाते हैं,
अपनों की छोटी बातों पर?
क्या साथ रहेगा ये गुरूर हमारा,
जब सितारे हँसेंगे रातों पर?
न जाने क्यों हम कल की फिक्र में,
आज का चैन गँवाते हैं?
जो लम्हा अभी है मुट्ठी में,
उसे क्यों यूँ ही जाने देते हैं?
न जाने क्यों हम दूसरों में,
बस कमियाँ ही ढूंढ पाते हैं?
क्या कभी झाँका है रूह के अंदर,
हम खुद को कितना जानते हैं?
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बदलाव का सफर
न हवाओं को कोसिये,
न वक्त से यूँ उलझिये,
बदलना ही दस्तूर है,
बस वक्त के संग चलिये...
न मंज़िल की फिक्र में,
रास्तों को भुलाइये,
सफर ही असली मंज़िल है,
बस कदम से कदम मिलाइये...
न दूसरों की चमक देख,
अपनी रौशनी कम कीजिये,
आप भी एक सूरज हैं,
बस खुद पर यकीं कीजिये...
न बंद मुट्ठी में रेत को,
रोकने की कोशिश कीजिये,
जो छूट रहा है उसे जाने दें,
बस नये लम्हों को जी लीजिये...
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भीतर का शोर
न बाहर शोर कीजिये,
न खुद से जंग लड़िये,
जो अनकहा है भीतर,
उसे खामोशी से पढ़िये...
न दूसरों की भीड़ में,
अपनी पहचान खोइये,
खुद के साथ भी कभी,
तन्हाई में होइये...
न जीत का अहंकार हो,
न हार का मलाल हो,
ज़िन्दगी ऐसी जिये,
कि न कोई सवाल हो...
न उम्र की लकीरों से,
हौसलों को नापिये,
हर दिन एक नया जन्म है,
बस मुस्कुरा कर जागिये...
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दसवाँ हिस्सा (सुकून का दान)
न सारा अपना समझिये,
न मुट्ठी बंद रखिये,
खुशियों का दसवाँ हिस्सा,
औरों के नाम लिखिये...
न ऊँचे ओहदे का मान हो,
न दौलत का गुमान हो,
बाँट सको जो रोटी अपनी,
तो तुम भी भगवान हो...
न दुआओं की गिनती कीजिये,
न एहसान कभी गिनाइये,
दिये से जला कर दिया,
बस अँधेरा दूर भगाइये...
न संचय की लगी हो होड़,
न कल की कोई फिक्र हो,
ज़िन्दगी वही मुकम्मल है,
जिसमें सबका ज़िक्र हो...
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जुबां की मिठास
न कड़वे बोल बोलिए,
न दिल किसी का तोड़िए,
शहद जैसी जुबां रखिए,
बस प्यार सबसे जोड़िए...
न ऊँची बात कीजिए,
न नीचा किसी को दिखाइए,
छोटा हो या बड़ा कोई,
बस अदब से सिर झुकाइए...
न बहस में वक्त खोइए,
न खुद को सही साबित कीजिए,
जहाँ कद्र न हो अल्फाजों की,
वहाँ खामोशी चुन लीजिए...
न नफरतों को पालिए,
न दिल में कोई मैल रखिए,
दुनिया एक मुसाफिरखाना है,
बस सबसे मेल रखिए...
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बड़प्पन की पहचान
न औकात किसी की नापिये,
न रसूख अपना दिखाइये,
मिलना हो अगर किसी से,
तो इंसानियत साथ लाइये...
न झुकने को कमजोरी समझिये,
न अकड़ को शान कहिये,
जो दरिया बन कर बह सके,
उसे ही इंसान कहिये...
न गलत का साथ दीजिये,
न हक किसी का मारिये,
गर जीतना है दिल यहाँ,
तो खुद को थोड़ा हारिये...
न दिखावे की इबादत हो,
न दिखावे की कोई रीत हो,
ज़िन्दगी वही खूबसूरत है,
जहाँ रूह में सिर्फ संगीत हो...
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ज़िन्दगी का फलसफा (एक लंबी कविता)
न महलों की चाहत रखिये,
न तख्तों का गुमान कीजिये,
मिट्टी के खिलौने हैं सब,
बस इंसानियत का मान कीजिये...
न शिकवे ज़माने से रखिये,
न किस्मत को कोसा कीजिये,
जो मिल गया वही नेमत है,
बस शुक्र में जिया कीजिये...
न कल की फिक्र में आज खोइये,
न बीते वक्त पर रोइये,
साँसों की पूंजी मिली है जो,
उसे खुलकर आज जी लीजिये...
न ऊँची आवाज़ में बोलिए,
न दिल किसी का तोड़िए,
मिठास घोलिए बातों में,
बस प्यार से सबको जोड़िए...
न रसूख की नुमाइश कीजिये,
न औकात किसी की नापिये,
रिश्तों में गर गर्माहट हो,
तो हर लम्हे को सुकून से मापिये...
न नफरतों के बीज बोइये,
न ईर्ष्या की आग में जलिये,
दुआओं का काफिला साथ हो,
बस ऐसी राह पर चलिये...
न दूसरों की चमक देखिये,
न खुद को कम आँखिये,
आप भी एक आफताब हैं,
बस अपनी रौशनी को पहचानिये...
न मतलब के हाथ मिलाइये,
न स्वार्थ के रिश्ते पालिये,
निस्वार्थ भाव से जो मिले,
उसे पलकों पर सजा लीजिये...
न भीड़ में अपनी पहचान खोइये,
न तन्हाई से घबराइये,
खुद के साथ भी वक़्त बिताकर,
कभी खुद से भी मिल आइये...
न जीत का अहंकार हो,
न हार का मलाल हो,
ज़िन्दगी ऐसी बसर कीजिये,
कि दिल में न कोई सवाल हो...
_वैभव कुमार सेजवार_
#SejwarInkOfficial
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