Monday, February 16

स्क्रीनशॉट में कैद लम्हे (कविता)


वो बातें जो कभी हवा में उड़ जानी थीं,
वो हँसी जो बस एक पल की कहानी थी।
मैंने उन्हें एक क्लिक में रोक लिया, 
वक्त के बहते दरिया को जैसे टोक लिया। 
ये स्क्रीनशॉट मेरी यादों की तिजोरी हैं।

तुम्हारी वो तारीफ और मेरा वो मुस्कुराना, 
पुरानी चैट के मलबे से उन पलों को उठाना। 
गैलरी के किसी अंधेरे फोल्डर में दबे हैं वो, 
आज भी उतने ही ताज़ा और सजे हैं वो। 
जैसे वक्त वहाँ आज भी ठहरा हुआ है।

कभी-कभी डर लगता है उन्हें फिर से देखने में, 
कहीं जल न जाऊं यादों की उस अगन में। 
पर वो सुबूत हैं कि हम कभी करीब थे, 
एक-दूसरे के लिए हम कितने अजीब और खुशनसीब थे। ये डिजिटल कागज़ कभी फटने वाले नहीं।

असली मैसेज तो शायद अब डिलीट हो चुके हैं, 
रिश्ते भी वक्त की गर्द में कहीं खो चुके हैं। 
पर ये स्क्रीनशॉट आज भी गवाही देते हैं, 
मेरे टूटे हुए दिल को थोड़ी पनाह देते हैं। 
ये मेरे बीते हुए कल का वजूद हैं।

फोन बदल जाएगा, 
डेटा भी शायद उड़ जाए, 
पर क्या ये यादें किसी और मोड़ पर मुड़ पाए? 
जब तक ये तस्वीरें हैं, 
तुम मेरे पास हो, 
भले ही हकीकत में अजनबी, 
पर अहसास में खास हो।
स्क्रीनशॉट में कैद,
वो मेरी ज़िंदगी का हिस्सा हैं।

लेखक : वैभव कुमार सेजवार

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