Monday, July 6

प्रेम क्या है

प्रेम क्या है...

प्रेम क्या है...?

जो मैंने तुझसे किया है।

प्यार सिर्फ "I Love You",
या "मैं तुमसे प्रेम करता हूँ",
"मैं तुमसे प्रेम करती हूँ" कह देने का नाम नहीं है।

प्रेम है...

- एक-दूसरे की खुशी में अपनी खुशी ढूँढ़ लेना।
- दुख के समय एक-दूसरे का सहारा बन जाना।
- गुस्से में भी एक-दूसरे को समझने की कोशिश करना।
- परिस्थितियाँ कितनी भी बदल जाएँ, फिर भी एक-दूसरे का साथ न छोड़ना।

याद रखना...

सच्चा प्रेम कभी परिपूर्ण नहीं होता।

कोई भी रिश्ता सौ प्रतिशत निर्दोष नहीं होता।

आख़िर हम इंसान हैं...

जहाँ प्रेम होगा, वहाँ कभी-कभी झगड़े भी होंगे।

गलतफहमियाँ होंगी।

गुस्सा होगा।

निराशाएँ भी आएँगी।

लेकिन...

दिन के अंत में...

जिसकी याद आपके चेहरे पर मुस्कान ले आए...

जिससे आपका रिश्ता हर हाल में बना रहे...

वही प्रेम है।

चाहे साथ पूरी उम्र का न हो...

चाहे दोस्ती कुछ दिनों की ही क्यों न रही हो...

यदि...

कुछ यादें सिर्फ उसी से जुड़ी हों...

कुछ बातें सिर्फ उसी से कही जा सकें...

जीवनसाथी बनने का सौभाग्य न मिले...

फिर भी वह आपकी हर धड़कन में बस जाए...

तो समझ लेना...

वही सच्चा प्रेम है।

जीवन में न जाने कितने लोग मिलते हैं।

कुछ लोग कुछ पलों के मेहमान बनकर आते हैं।

कुछ लोग यादों में हमेशा के लिए बस जाते हैं।

लेकिन...

जो हर खुशी में...

हर संघर्ष में...

हर सपने में...

आपके साथ खड़ा दिखाई दे...

वही आपके प्रेम की सबसे सुंदर अनुभूति बन जाता है।

क्योंकि...

प्रेम किस्मत से मिलता है।

लेकिन उसे निभाने के लिए...

विश्वास चाहिए।

धैर्य चाहिए।

सम्मान चाहिए।

त्याग चाहिए।

और कभी-कभी पूरे परिवार का साथ भी चाहिए।

सच्चा प्रेम कभी समाप्त नहीं होता।

वह समय के साथ और गहरा होता जाता है।

हाँ...

मुझे तुझसे प्रेम है।

क्योंकि...

प्रेम का अर्थ सिर्फ किसी को पा लेना नहीं होता।

कभी-कभी...

किसी को जीवन भर अपने दिल में संजोकर रखना भी प्रेम होता है।

कुछ लोग हमारे साथ नहीं चलते...

लेकिन उनकी यादें उम्र भर साथ चलती हैं।

कुछ नाम होंठों तक नहीं आते...

फिर भी हर दुआ में शामिल रहते हैं।

कुछ रिश्ते किसी बंधन में नहीं बँधते...

फिर भी सबसे अपने लगते हैं।

तू मेरे जीवन की वह कहानी है...

जिसका हर पन्ना मैंने अपने दिल से पढ़ा है।

चाहे समय बदल जाए...

चाहे रास्ते बदल जाएँ...

चाहे हम बदल जाएँ...

लेकिन तेरी याद का एक कोना...

मेरे दिल में हमेशा वैसा ही रहेगा।

क्योंकि...

प्रेम का अर्थ केवल साथ रहना नहीं होता।

कभी किसी की यादों में उम्र भर बस जाना भी प्रेम होता है।

तू मिले या न मिले...

यह किस्मत की बात है।

लेकिन तुझे चाहना...

मेरे दिल की इबादत है।

तू मेरे विश्वास की आस्था है।

यदि जन्मों का कोई रिश्ता होता है...

तो शायद...

तू वही अधूरी प्रार्थना है...

जो दोस्ती बनकर मेरे जीवन में आई...

और जिसे मेरा दिल...

हर जन्म में...

फिर से माँगेगा।

— Written & Composed by Vaibhav Kumar Sejwar

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कुछ लोग बिछड़कर भी अपने रह जाते हैं...

कुछ लोग बिछड़कर भी अपने रह जाते हैं... हर प्रेम... मंज़िल तक पहुँचे... यह ज़रूरी नहीं होता... कुछ प्रेम... रास्तों में बिछड़कर भी... उम्र भर...