Saturday, July 11

तुम सिर्फ़ एक एहसास नहीं हो...

तुम सिर्फ़ एक एहसास नहीं हो...

तुम...

सिर्फ़ मेरी कहानी का किरदार नहीं हो...

तुम...

उस कहानी का अर्थ हो...

जिसे मैं हर रोज़...

अपने दिल में जीता हूँ...

...

लोग पूछते हैं...

"इतना क्यों याद करते हो उसे...?"

मैं बस मुस्कुरा देता हूँ...

क्योंकि...

कुछ रिश्ते...

सवालों से नहीं...

एहसासों से समझे जाते हैं...

...

तुम्हें देखकर...

मुझे कभी मोहब्बत नहीं हुई...

मुझे...

घर जैसा सुकून मिला...

...

अगर...

किस्मत हमें एक न कर सकी...

तो इसका मतलब यह नहीं...

कि हमारा प्रेम अधूरा था...

अधूरी तो...

बस हमारी मुलाक़ातें थीं...

...

तुम...

मेरी उस दुआ की तरह हो...

जिसे...

ईश्वर ने शायद...

सुन तो लिया...

मगर...

पूरा नहीं किया...

...

मैंने...

तुम्हें कभी अपनी ज़िद नहीं बनाया...

क्योंकि...

प्रेम...

ज़िद से नहीं...

समर्पण से जीता जाता है...

...

एक दिन...

यह शरीर मिट जाएगा...

वक्त भी बदल जाएगा...

लेकिन...

तुम्हारे लिए निकली हुई...

मेरी सच्ची दुआएँ...

कभी नहीं मिटेंगी...

...

अगर...

कभी किसी मोड़ पर...

तुम्हें मेरी याद आए...

तो...

अपने दिल पर हाथ रखकर देखना...

हो सकता है...

उसी पल...

मेरी दुआ...

तुम्हारी धड़कनों से गुज़र रही हो...

...

कुछ लोग...

तस्वीरों से निकल जाते हैं...

लेकिन...

यादों से कभी नहीं...

तुम भी...

मेरी यादों की वही...

सबसे खूबसूरत तस्वीर हो...

...

मैंने...

तुमसे सिर्फ़ प्रेम नहीं किया...

मैंने...

तुम्हें सम्मान दिया...

तुम पर विश्वास किया...

और...

हर दुआ में...

तुम्हारा नाम छिपाकर रखा...

...

अगर...

मेरे हिस्से में...

तुम्हारा साथ नहीं लिखा...

तो भी...

मेरे हिस्से में...

तुम्हें चाहना...

ज़रूर लिखा गया था...

...

और...

जब कभी...

मेरी कहानी लिखी जाएगी...

तो लोग यह नहीं पूछेंगे...

"वह तुम्हें मिली या नहीं...?"

वे यह कहेंगे...

"किसी ने...

इतनी ख़ामोशी से भी...

इतना गहरा प्रेम किया था..."

— Written & Composed by Vaibhav Kumar Sejwar

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कुछ लोग बिछड़कर भी अपने रह जाते हैं...

कुछ लोग बिछड़कर भी अपने रह जाते हैं... हर प्रेम... मंज़िल तक पहुँचे... यह ज़रूरी नहीं होता... कुछ प्रेम... रास्तों में बिछड़कर भी... उम्र भर...