सिर्फ़ धड़कनों का रिश्ता नहीं...
यह दो आत्माओं के बीच...
ईश्वर की सबसे ख़ामोश भाषा है...
...
किसी ने पूछा...
"इतना प्रेम क्यों करते हो उससे...?"
मैंने मुस्कुराकर कहा...
"क्योंकि वजह से किया गया प्रेम...
वजह बदलते ही बदल जाता है..."
...
मैंने...
तुम्हें पाने से पहले भी चाहा था...
और...
अगर कभी खो भी दिया...
तो चाहना नहीं छोड़ूँगा...
...
प्रेम...
हर दिन मिलने का नाम नहीं...
हर दिन...
एक ही इंसान के लिए...
दुआ करने का नाम है...
...
तुम्हें शायद...
कभी एहसास भी न हो...
कि...
मेरी हर ख़ुशी की शुरुआत...
तुम्हारी मुस्कान से होती है...
...
कुछ लोग...
ज़िंदगी में इसलिए नहीं आते...
कि हमेशा साथ रहें...
कुछ लोग इसलिए आते हैं...
ताकि हमें...
सच्चे प्रेम का अर्थ सिखा जाएँ...
...
मैंने...
कभी तुम्हें अपनी ज़िंदगी नहीं कहा...
क्योंकि...
ज़िंदगी तो एक दिन ख़त्म हो जाती है...
तुम...
मेरी रूह की वह कहानी हो...
जो कभी ख़त्म नहीं होगी...
...
अगर...
प्रेम में कोई परीक्षा होती है...
तो उसका सबसे कठिन प्रश्न...
"इंतज़ार" होता है...
और...
सबसे सुंदर उत्तर...
"विश्वास..."
...
तुम्हारी आवाज़...
आज भी...
मेरे दिल की सबसे प्यारी धुन है...
जिसे...
समय भी पुराना नहीं कर पाया...
...
एक बात याद रखना...
जिस रिश्ते में...
सम्मान मर जाता है...
वहाँ प्रेम...
ज़्यादा दिन ज़िंदा नहीं रहता...
...
मैं...
आज भी...
हर रात...
तारों से यही कहता हूँ...
अगर वह मुस्कुरा रही हो...
तो मेरी तरफ़ से...
एक दुआ और पहुँचा देना...
...
तुम...
मेरी उस कविता की तरह हो...
जिसे...
मैंने कभी पूरा नहीं लिखा...
फिर भी...
वह मेरी सबसे सुंदर रचना बन गई...
...
अगर...
कभी हमारी कहानी...
लोगों को अधूरी लगे...
तो उन्हें कह देना...
हर प्रेम कहानी का...
मंज़िल तक पहुँचना ज़रूरी नहीं होता...
कुछ कहानियाँ...
दिल तक पहुँचकर ही...
अमर हो जाती हैं...
...
और...
जिस दिन...
मेरी आख़िरी साँस चलेगी...
उस दिन भी...
मेरे होंठों पर...
कोई शिकायत नहीं होगी...
सिर्फ़ एक दुआ होगी...
"जहाँ भी रहो... खुश रहो..."
क्योंकि...
सच्चा प्रेम...
कभी किसी को पाने की ज़िद नहीं करता...
वह...
उसकी खुशियों में...
अपनी पूरी दुनिया ढूँढ़ लेता है...
— Written & Composed by Vaibhav Kumar Sejwar
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