Wednesday, July 8

बारिश और तुम


पहली बारिश की पहली बूंद जब ज़मीं को छू जाती है,
वैसे ही तेरी याद मेरे दिल में ख़ामोशी से उतर जाती है।

भीगी हवाओं में तेरे नाम की ख़ुशबू घुल जाती है,
हर गिरती बूंद मुझे तेरी मुस्कान याद दिलाती है।

चलो आज फिर उसी बारिश में खो जाएँ,
बिना कुछ कहे एक-दूजे की धड़कनों को सुन जाएँ।

तेरे हाथों की गर्माहट और मौसम की ठंडी फुहार,
बस इतना ही काफ़ी है, बन जाए हर लम्हा त्यौहार।

बादलों की ओट में चाँद भी मुस्कुराने लगता है,
जब तू मेरी बाँहों में सिमटकर शर्माने लगता है।

बारिश थम भी जाए तो क्या फ़र्क़ पड़ता है,
तेरे साथ बिताया हर पल उम्र भर बरसता है।

अगर मोहब्बत का कोई सबसे हसीन मौसम है,
तो वो बारिश नहीं... तेरे साथ भीगना है। ❤️🌧️


Written & Composed by Vaibhav Kumar Sejwar

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